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शब्दब्रह्म के शब्द,15/4/24
शब्दब्रह्म के शब्द 1. सुहृद2. अनासक्त 3.भगसेवक4. ब्रह्मज्ञान संसार जंगल से सकुशल पार जाने के लिए इन चार शब्दों का आसरा नितांत आवश्यक है। “भगवत सेवक:- जब कोई अच्छा संग मिल जाय, अच्छी बात मिल जाय, अच्छा भाव पैदा हो जाय, अचानक भगवान्की याद आ जाय, तब समझना चाहिये कि यह भगवान्की विशेष कृपा हुई…
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भरत चरित्र
“पूर्वजन्ममें भरत नामका राजा था। ऐहिक और पारलौकिक दोनों प्रकारके विषयोंसे विरक्त होकर भगवान्की आराधनामें ही लगा रहता था; तो भी एक मृगमें आसक्ति हो जानेसे परमार्थसे भ्रष्ट होकर अगले जन्ममें मृग बनना पड़ा।किन्तु भगवान् श्रीकृष्णकी आराधनाके प्रभावसे उस मृगयोनिमें भी पूर्वजन्मकी स्मृति लुप्त नहीं हुई।“ सारांश यह है कि – “विरक्त महापुरुषोंके सत्संगसे प्राप्त…
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रामसुख दास जी , शरण
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