http://narayanabanks.blogspot.com/2024/04/17.html
पूर्व के विचारों को ठीक करने की कोशिश ना करें।
वर्तमान के विचारों निर्विकार बनाएं।
भविष्य के विचार वर्तमान के विचारों से निर्मित होते हैं। संकल्प की शक्ति बहुत बड़ी होती है।
नारायण कवच में रचना पालन संघार स 12 * 12 * 12.
श्रीमद् भागवत में रचना पालन संघार स 4 * 4 * 4
अतरानुवर्णते अभिक्षण्म vishwatma Bhagwan हरि।
यस्य प्रसाद जो ब्रह्मा रूद्र क्रोध समुद्भाव.
स्पर्श बिना वायु नहीं। शब्द विनाश स्पर्श नहीं।
बुद्धिमान व्यक्ति को मन का विश्वास नहीं करना चाहिए। चालक व्याध,महादेव, व्याभिचारिणी स्त्री का पति।
