
शब्दब्रह्म के शब्द 1. सुहृद2. अनासक्त 3.भगसेवक4. ब्रह्मज्ञान
संसार जंगल से सकुशल पार जाने के लिए इन चार शब्दों का आसरा नितांत आवश्यक है।
“भगवत सेवक:- जब कोई अच्छा संग मिल जाय, अच्छी बात मिल जाय, अच्छा भाव पैदा हो जाय, अचानक भगवान्की याद आ जाय, तब समझना चाहिये कि यह भगवान्की विशेष कृपा हुई है, भगवान्ने मेरेको विशेषतासे याद किया है। इस प्रकार भगवान्की कृपाकी तरफ देखे, उसका ही भरोसा रखे तो उनकी कृपा बहुत विशेषतासे प्रकट होगी।“
सुहृत:-अपने स्वार्थके लिये जो कर्म किया जाय, वह पाप है और दूसरेके हितके लिये जो कर्म किया जाय, वह पुण्य है।
श्री परमात्मने नमः
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ब्रह्म ज्ञान:- भगवान् को याद करनेमात्रसे वे प्रसन्न हो जाते हैं-‘अच्युतः स्मृतिमात्रेण! भगवानसे एक ही चीज मांगों कि ‘हे नाथ! मैं आपको भूलूं नहीं’ यह एक मंत्र है जिससे भगवान की स्मृति होगी ! स्मृति होनेसे आपमें शान्ति आनन्द दया क्षमा उदारता आदिका ठिकाना नहीं रहेगा ! सम्पूर्ण दुःखोका अत्यन्त अभाव हो जायगा ! केवल उनको हर समय याद रखो ! भगवानको याद रखनेमात्रसे सब ऋद्धियां सिद्धियां पासमे आ जाती है!
परमश्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराजके प्रवचनोसे संगृहीत
अनासक्ति:- भगवान् को याद करनेमात्रसे वे प्रसन्न हो जाते हैं-‘अच्युतः स्मृतिमात्रेण’!
भगवानसे एक ही चीज मांगों कि ‘हे नाथ! मैं आपको भूलूं नहीं! यह एक मंत्र है जिससे भगवान की स्मृति होगी !
स्मृति होनेसे आपमें शान्ति आनन्द दया क्षमा उदारता आदिका ठिकाना नहीं रहेगा ! सम्पूर्ण दुःखोका अत्यन्त अभाव हो जायगा ! केवल उनको हर समय याद रखो ! भगवानको याद रखनेमात्रसे सब ऋद्धियां सिद्धियां पासमे आ जाती है।
